Monday, May 30, 2011

pakistan aur wikelikes

विकीलीक्स पर हुए खुलासे में 18 मार्च, 2009 को ऐने पैटरसन द्वारा भेजे गए केबल का हवाला देते हुए कहा गया है कि भारतीय वायुसेना की क्षमता पाकिस्तान के मुकाबले दो गुनी (भारत के 736 जेट फाइटर के मुकाबले पाकिस्तान के पास 370 लड़ाकू जेट) है। केबल के मुताबिक पाकिस्तान के पास न सिर्फ लड़ाकू विमानों की कमी है बल्कि भारतीय वायुसैनिकों की तुलना में पाकिस्तानी वायुसैनिक ट्रेनिंग और रणनीतिक कौशल में भी काफी पीछे हैं। भारत के मुकाबले इन्हीं कमजोरियों के चलते पाकिस्तान अपनी परमाणु, मिसाइल क्षमता का तेजी से विकास करने के अलावा अपनी वायुसेना की ताकत भी तेजी से बढ़ा रहा है। पाकिस्तान को एफ-16 विमान देने से उसकी वायुसेना की क्षमता बढ़ जाएगी और भारत से जंग की सूरत में पाकिस्तान को परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से पहले कुछ वक्त मिल जाएगा। हालांकि, भारत की ताकत को देखते हुए पाकिस्तान की यह क्षमता ज़्यादा देर तक टिकेगी नहीं लेकिन फिर भी इस वक्त का इस्तेमाल दोनों देशों के बीच परमाणु युद्ध रोकने के लिए किया जा सकता है। 

गौरतलब है कि अमेरिका ने पाकिस्तान को बड़े पैमाने पर लड़ाकू विमान और हथियार सौंपे हैं, लेकिन भारत को लेकर पाकिस्तान की असुरक्षा की भावना अब भी कायम है। यही वजह है कि पाकिस्तान तेजी से परमाणु हथियार बनाने के अलावा पाकिस्तान ने छोटी दूरी की हत्फ-9 मिसाइल का परीक्षण किया है। इसके साथ ही पाकिस्तान कम क्षमता वाले परमाणु हथियार भी विकसित कर रहा है। साफ है कि भारत के साथ जंग की सूरत में पाकिस्तान इन हथियारों का भारत के खिलाफ इस्तेमाल करने को तैयार है। पाकिस्तान की ऐटमी क्षमता का अध्ययन कर रहे अमेरिकी विशेषज्ञ हैंस क्रिसटेंसन के मुताबिक न्यूक्लियर क्षमता वाले एनएएसआर वे हथियार हैं, जिनका पाकिस्तान तब इस्तेमाल कर सकता है जब भारतीय फौज उनकी ज़मीन की तरफ बढ़ रही हो।  

हालांकि, हैंस क्रिसटेंसन का मानना है कि ऐसे हथियारों के इस्तेमाल से भारत के वजूद पर कोई खतरा नहीं होगा लेकिन इसके इस्तेमाल से दोनों देशों के बीच परमाणु हथियारों को अब तक इस्तेमाल न करने की परंपरा टूट जाएगी। हैंस के मुताबिक इन हथियारों से भारत का कोई शहर तबाह नहीं होगा, लेकिन पाकिस्तान की तरफ बढ़ने वाली भारतीय फौजों को इससे नुकसान होगा।

विकीलीक्स ने कुछ हफ्तों पहले खुलासा किया था कि पाकिस्‍तानी सेना प्रमुख जनरल अशफाक परवेज कयानी परमाणु हथियारों का ‘पहले इस्तेमाल’ नहीं करने की राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की नीति का समर्थन नहीं करते। विकीलीक्स ने अमेरिका के गोपनीय राजनयिक संदेशों के हवाले से कहा था कि हालांकि कयानी इस मुद्दे पर खामोश रहे हैं, लेकिन वह जरदारी के उस बयान का समर्थन नहीं करते जिसमें जरदारी ने पिछले साल भारतीय मीडिया से बातचीत में कहा था कि पाकिस्तान पहले से परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करने की नीति पर चलेगा।

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